वाहन बीमा -:

वाहन बीमा किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर हमारे आर्थिक नुकसान की भरपाई करता है। बीमा इंश्योरेंस कंपनी और आपके बीच एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट होता है। जिसके तहत कानूनी रूप में एग्रीमेंट किया जाता है कि आप प्रीमियम देंगे और कंपनी वाहन दुर्घटना होने पर आर्थिक नुकसान की भरपाई करेगी। कंपनी कोन कोन से आर्थिक नुकसान की भरपाई करेगी, इसके लिए आपको वाहन बीमा के प्रकार के बारे में जानना पड़ेगा।.

एक मानक मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी मुख्य रूप से दो प्रकार की सुरक्षा देती हैः पहला, खुद का नुकसान (ओन डैमेज) कवर होता है और दूसरा, थर्ड पार्टी (टीपी) यानी दूसरा पक्ष का भी कवर होता है। सड़क दुर्घटना में आपके वाहन में हुई टूट-फूट के लिए ओन डैमेज कवर देता है। दूसरी तरफ, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस आपको अन्य व्यक्ति के प्रति कानूनी देनदारियों के खिलाफ कवर देता है, जिसमें मृत्यु, चोट, वाहन या किसी अन्य संपत्ति को नुकसान शामिल हैं।. यहां फर्स्ट पार्टी वाहन चलाने वाला और थर्ड पार्टी वाहन की चपेट में आने वाला होता है. यह बीमा वाहन मालिक को भी बचाता है।

वाहन बीमा प्रकार -:

फुल बीमा- अगर किसी वाहन के साथ दुर्घटना हो जाती है तो फुल  बीमा में सभी तरह के नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। इसमें दुर्घटना के समय वाहन में बैठे लोगों के साथ ड्राइवर और वाहन के अलावा सामने वाले वाहन, उसमें बैठे लोग और ड्राइवर के आर्थिक नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है।
फुल बीमा = थर्ड पार्टी इंश्योरेंस + खुद का नुकसान + कुछ ऐड करें जाते है जैसे ड्राईवर बीमा इत्यादि


थर्ड पार्टी इंश्योरेंस -:

जैसा कि यह स्पष्ट है, पहला कवर आपके वाहन को हुए किसी भी नुकसान पर लागू होता है, जबकि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस आपके द्वारा किसी थर्ड पार्टी को हुए नुकसान के खिलाफ आपको सुरक्षा देता है। उपर्युक्त दोनों में से थर्ड पार्टी ही एकमात्र इंश्योरेंस है, जो मोटर वाहन अधिनियम के तहत अनिवार्य है। यही वजह है कि इंश्योरेंस कंपनियां एक व्यापक पॉलिसी का हिस्सा होने के अलावा अलग से थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी भी बेचती हैं। वाहन बीमा के अंतर्गत थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का प्रावधान है। दुर्घटना पर तीसरे पक्ष के आर्थिक नुकसान की बीमा कंपनी भरपाई करती है। दुर्घटना के दौरान तीसरे पक्ष की मौत हो जाती है तो बीमा कंपनी इसका भुगतान करती है।

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम भारतीय इंश्योरेंस नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के दिशानिर्देशों के अनुसार तय किया गया है और यह केवल आपके वाहन के इंजन और क्यूबिक साइज पर निर्भर करता है - साइज जितनी ज्यादा होगी, प्रीमियम उतना ही अधिक होगा।

प्राइवेट कार के लिए :-

1000 सीसी से कम क्षमता  के लिए— 1850 रु
1000 सीसी से 1500 सीसी क्षमता  के लिए— 2863 रु
1500 सीसी से अधिक क्षमता के लिए— 7890 रु

दोपहिया वाहन के लिए -:

75 सीसी से कम तक के लिए— 427 रु
75 सीसी से 150 सीसी तक के लिए— 720 रु
150 सीसी से 350 सीसी तक के लिए— 985 रु
150 सीसी से 350 सीसी तक के लिए— 2323 रु

व्यावसायिक वाहनों व टैक्सी के लिए :-

1000 सीसी से कम क्षमता वाले वाहनों के लिए— 5,437 रु
1000 सीसी से 1500 सीसी वाले वाहनों के लिए— 7,147 रु
1500 सीसी से अधिक क्षमता वाले वाहनों के लिए— 9,472 रु

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के फायदे -:

लोग सोचते हैं कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में बीमा कराने वाले को कोई फायदा नहीं होता। यह बात सही है, मगर बीमा कराने वाले को कोई घाटा भी नहीं होता। क्योंकि यह इंश्योरेंस बीमाधारक को सभी वाहन दुर्घटना में आर्थिक नुकसान से बचाता है। इन खर्चों में अस्पताल और कानूनी खर्चे भी शामिल होते हैं। कई बार ऐसे भी होता है कि क्षतिग्रस्त होने वाले की हैसियत आपसे कई गुना ज्यादा हुई तो आप उसको हर्जाना देने लायक नहीं होते ऐसे में बीमा कंपनी क्लेम देती है।
थर्ड पार्टी वाहन बीमा के अंतर्गत दुर्घटनाग्रस्त में आदमी को शारीरिक नुकसान होता है तो उसका हर्जाना बीमा कंपनी भरती है। इसमें अस्पताल का खर्च, उसकी कमाई का नुकसान और अन्य परेशानियों का खर्च शामिल किया जाता है।
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करती है। यहां आपको ध्यान देना होगा कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के अंतर्गत केवल दुर्घटना से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई ही बीमा कंपनी करती है। अपराध में शामिल वाहन पर बीमा कंपनी कोई मदद नहीं करती।

भारतीय संविधान के अनुसार दुर्घटना से होने वाले शारीरिक और संपत्ति नुकसान का न्यनतम मूल्य वाहन चालक को चुकाना होता है।नया वाहन खरीदने के साथ ही वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2018 से सभी नए वाहनों का खरीदने के साथ ही पांच साल का के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य कर दिया है।

क्लेम कैसे करें -:

यदि कोई वाहन आपको या आपके वाहन को टक्कर मार देता है, तो आप शारीरिक चोटों के इलाज के लिए चिकित्सा खर्चों का क्लेम कर सकते हैं। मृत्यु के दुर्भाग्यपूर्ण मामले में, आश्रित आय न रह जाने के विरुद्ध क्लेम दायर कर सकते हैं। मौत हो जाने से पहले चोट/चोटों के इलाज में होने वाले चिकित्सा खर्चों के लिए भी थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के तहत दावा किया जा सकता है। और दावा करने के लिए वकील की आवश्यकता पड़ेगी.
बहरहाल, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के माध्यम से दावा करना एक बेहद मुश्किल काम है। आपके लिए यही सलाह है कि यदि आपके पास व्यापक मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी है, तो 'ओन डैमेज' कवर से ही दावा करना बेहतर होगा। यह आपका बहुत सारा समय और तनाव बचाएगा.

मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी (बिमा )करते समय सारी जानकारी ध्यान पूर्वक देखनी चाहिए.