इस बात पे निर्भर करता है की आप कितनी जिम्मेदारी उठाना अपना कर्तव्य मानते है. हा आज जो सब्द आप देख रहे है. कर्तव्य आज के टाइम में ये विलुप्ती के कगार पर पहुंच गया है.और आने वाले टाइम में ये शब्द ना देखा जायेगा और ना ही कोई इसका मतलब किसी की जिंदगी में क्या मायने रखता है. और जिंदगी में कैसे अमल में लाया जाता है.  ना ये पता होगा किसी को बस ये बाते ही इसी बात को निर्धारित करती है.एक बड़े भाई और बहन का क्या  कर्तव्य है. वैसे तो आप लोग सब जानते है लेकिन फिर भी में एक छोटी सी लाइन में समजने की कोशिश करता हु.

कर्तव्य - यानि वो जिम्मेदारी जो बड़े होने के नाते अपने परिवार जनों के हित को देखते हुए और सब लोगो के प्रति जो भी जिम्मेदारी बनती है. उसका ईमानदारी से निर्वाह करना ही कर्तव्य कहलाता है. जिसमे कई बार ऐसा भी समय आता है की अपने आप को नीचे रखते हुए अपने परिवार जनों को ऊपर रखना पड़ता है. या ये कह सकते है की बहुत बड़ा बलिदान भी देना पड़ जाता है. अब आप इस बात को में आपको एक उदारण दे के समजाता हु.जो मेने अपने जीवन में देखा है. बात सच्ची है लकिन में यहां किसी का नाम नहीं लेना चाहूंगा. बस आपको बाते बताता हु.

मेरे जीवन में मैंने दो अलग अलग उम्र के लोगो के जीवन को देखा है. जो पहला परिवार था उसकी बात रही होगी लगभग 1996 के आस पास की उनके बड़े भाई नहीं रहे और उन्होंने अपनी भाभी से शादी की यानि अपने परिवार की खुशी के लिए उन्होंने अपनी खुशियों का बलिदान कर दिया था. जबकि दोनों की उम्र में काफी अंतर भी था यानी ये कह सकते है की भाभी बहुत बड़ी थी लेकिन उन्होंने फिर भी उनके जीवन में उनका साथ दिया.
जो बहुत बड़ी बात थी.

और दूसरा परिवार अभी 2018 की बात है. बहुत सारे लोगो के समझाने के बाद भी बड़े भाई के जाने के बाद छोटे भाई ने साफ़ साफ़ मना कर दिया की में ये शादी नहीं कर सकता. जैसा मेने देखा 2018 में कर्तव्य जिंदगी से विलुप्त हो गया.

लकिन आज की स्वार्थी दुनिया ना ही इस शब्द को जानती है. और न इसका मतलब. जहां तक मैने दुनिया की देखा है. जरुरी नहीं कि मेरी बात को आप सहमत हो. लकिन ये बाते में आज अपने लाइफ के उन अनुभव से बता रहा हु जो मेने अपने जीवन में महसूस की है. खेर जैसे आप और आज की दुनिया सही समझे.मेरा मानना तो यही है कि आने वाले टाइम में कर्तव्य नाम और काम से विलुप्त हो जायेगा.

ये जो बातें ऊपर बताई गयी है ये तो थी भारतीय संस्कर्ति की वो बाते जिसकी वजह से सारी दुनिया में सबसे महान संस्कर्ति बनती है.

अब इसी बात को समझते हुए हम बड़े भाई या बहन होने को विस्लेशन करेंगे. बड़े भाई का होना या न होना ठीक उसी तर्क से सम्बन्ध रखता है जैसे इंसान पत्थर में भगवान को देखता है. अगर कोई मानता है तो उसके लिए भगवान है तो है और अगर नही मानता है तो उसके लिए कुछ भी नहीं है.

ठीक वैसे ही बड़ा होने पे आगे कोई अपने कर्तव्य का पालन करता है. और पालन करना मतलब समझ रहे हो न शाहेब जी जो बाते मैने उपर बताई है उन सब बातों को जीवन में अमल में लाना ही होगा जब भी जरुरत पड़ेगी चाहे उसके
लिए बलिदान ही क्यू न देना पड़े क्यू की कर्तव्य की आखिरी बात है वो बलिदान ही है और ज्यादातर लाइफ में वो एक बार तो मांग ही लेता है.

और अगर नहीं मानते तो क्या फर्क पड़ता है फिर बड़े हो या छोटे फिर मस्त रहो. जैसे पथर को भगवन ने मानने वाला उसी पाथर पर पैर रख के जीवन में आगे बढ़ जाता है.

और हा एक बात और सब के अपने अपने कर्तव्य होते है. वो बात अलग है की कोई मानता है कोई नहीं मानता है. ठीक वैसे ही भगवन और पत्थर वाली बात की तरह.

लकिन इस स्वार्थी दुनिया में ये बाते शायद अब थोड़ा बहुत मायने रखती हो. लकिन आने वाले टाइम में इन बातों का मतलब भी जान पायेगा कोई या नहीं.

चलो आज यहीं विराम करते है.