2007 - 2005 में 12 वीं करने के बाद. आर्मी की तैयारी कर रहा था प्राथमिक निजी स्कूल मुझे 600 रु की तन्खा मासिक मिलती थी! यारो हसो नहीं! सच्चाई बता रहा हु! उसी साल मुझे एक छोटी सी नौकरी (सुपरवाइज़र)मिल गयी!(2500 रु की तन्खा मासिक) नौकरी करना मज़बूरी थी क्यू की आगे की पढ़ाई करने क पैसे नहीं थे! पर मन बहुत था पढ़ने का ये मान लो जूनून था! लकिन मज़बूरी भी बड़ी थी वो थी पेसा और घर की  जिम्मेदारी!चलो छोड़ दो अब आगे देखते है!वैसे तो पूरी लाइफ पता नहीं कितनी मूवीज और किताबे निकल जायेगी इसीलिए शार्ट में बताता हु!
2008 - 2008 में आने के बाद पढाई स्टार्ट करने का मन बनाया लकिन नहि हो सका क्यू की कुछ जिमेदारी ज्यादा जरूरी थी! हा नौकरी में जरूर कुछ प्लस हो रही थी! (3500 रु की तन्खा मासिक)!इसी के साथ एक जरुरी काम भी हो गया जिस के कारण कुछ कर्ज लेना पड़ा.भुगतान करते हुए कब 2009 आ गया पता ही नही चला.
2009 - 2009 पढाई स्टार्ट करने का मन बनाया. प्रॉब्लम ये थी कि क्या किया जाये कोई बताने वाला भी नहीं था. जो भी था में और मेरी छोटी सी नॉलेज. जो अब तक जीवन को जीने में मैंने सीखी थी. लकिन फिर रास्ता ढूंढ़ना शुरू किया. लगभग दो महीने बाद मुझे पता लगा की में रेगुलर नहीं पढ़ सकता ककी मुझे जॉब रागुळर करनी थी. क्यू की जॉब ही मेरी लाइफ का एक मात्र सहारा था.फिर मुझे मेरे दोस्त से इग्नू के बारे  में पता चला.जो काम पेसो में पढाई करता है.मुझे बीसीए दाखिला मिल गया.और हा सैलरी भी कछुए की चाल से बढ़ रही थी (4500 रु की तन्खा मासिक)
2010 -2010 में अपनी पूरी ताकत के साथ पढाई करने में लगा रहा. और हा सैलरी भी कछुए की चाल से बढ़ रही थी (6000 रु की तन्खा मासिक) और भी अनुभव होते रहे जिंदगी के!
2011 - 2011 में  बीसीए  पूरी हुयी. इतना आसान नहीं था ये सफर जितना आज मैने दो लाइन में बता दिया. गर  मेरी बात की सच्चाई को तोलना हो तो बस एक लाइन में बता देता हु एक हफ्ते का एक दिन होता था मेरा नींद तो मुझे रोक आकर कहती थी आगे थोड़ा टाइम हो तो महाराज जी थोड़ी नींद ले लो अब और में हस्ते हुए बोल देता था. नही अभी सोने का टाइम नहीं है. नतीजा यह होता की कभी कमर सीधी करने को बेड पे लेट जाता तो 4 गंटे खा चले जाते मानो बस अभी तो लेता था  फर्क तो घडी देख क पता चलता  की चार घंटे हो गये क्यू की रात की शिफ्ट नोकरी! और दिन मुझे कक्षा में शामिल होना.हालत ये थी की सरीर भी बाइक चलने पे कम्पन होती रहती थी.
2012 - 2012 M.सी ए  में प्रवेश लिया. नींद पूरी न होने की वजह से कई बार पेपर भी छूट गए और लैब एग्जाम भी. लकिन में बस बढ़ता चला गया. कुछ दोस्त भी बने कुछ बुरे लोग भी मिले लकिन सब मेरे एक्सपीरियंस का हिस्सा बनते चले गये. और हा सैलरी भी कछुए की चाल से बढ़ रही थी (9000 रु की तन्खा मासिक).
2013 - ये सब करते करते कब 2013 चला गया पता ही नही चला. (11000 रु की तन्खा मासिक) वैसे तो पढाई 2013 में पूरी होनी थी क्यू की मुझे डायरेक्ट सेकंड ईयर में परवेश मिला था लकिन में पूरा  नहीं कर पाया और 2014 आ गया.
2014 - 2014 में सब पेपर क्लियर हो गये और प्रोजेक्ट भी क्लियर हो गया.(सैलरी भी अब 14000 रु की तन्खा मासिक) अब में 12 वीं पास नहीं था मेरे पास बीसीएऔर M.सी ए  की डिग्री थी. तभी हमे एक आईटी कंपनी में नौकरी मिल गयी. जो इतना आसान नहीं था. 3 महीने बाद पता चला कि जिसने हमे नौकरी दी थी वो फ़्रौड थी. में अपनी पुरानी जॉब भी छोड़ चूका था (2007-2014(सुपरवाइज़र)). तब मुझे ये सब पता चला तो में टूट गया था.लकिन फिर मेने दूसरी जॉब की तलाश की जो बिलकुल आसान नहीं थी. फिर मुझे 6000 की एक जॉब मिल गयी अछि  बात ये थी की वो जॉब आईटी कंपनी में थी.ये सब करते हुए कब 2014 चला गया मुझे पता नहीं चला.
क्यू की मुझे कई बार जॉब चेंज करनी पड़ी.
2015 - और फिर मुझे 2015 में जा के एक अच्छी जॉब मिली (17000 रु की तन्खा मासिक).जिंदगी का अनुभव तो साथ साथ चल ही रहा था.और हा अब मुझे रात सोने के मिलने लगी थी.
2016 - जिंदगी और शरीर में बहुत बदलाव के बाद कुछ बीमारी भी आ गयी जीवन चलने का नाम है  रुकना नही है( सैलरी भी अब 30000 रु की तन्खा मासिक).
2017 - 2017 सब नार्मल ही चल रहा है अभी भी चल रहा है और सैलरी भी अब 35000 रु की तन्खा मासिक हो गयी थी.

हुआ तो और भी बोत कुछ था लकिन सब शार्ट में बताया है. खेर आज यही खतम करते है.